Excerpts of Shri Narendra Modi’s interview with Navbharat Times:

करीब दो महीने तक चले मैराथन इलेक्शन कैंपेन में जमकर हुआ नमो-नमो का जाप। जाहिर है, बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को एनडीए जहां हीरो के रूप में पेश कर रहा था, वहीं यूपीए और अन्य दल उन्हें विलेन साबित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन भारतीय लोकतंत्र में पहली बार ऐसा चुनाव देखने को मिला, जो सत्तापक्ष की मुखालफत के बजाय विपक्ष के एक 'कद्दावर' पीएम कैंडिडेट को केंद्र में रखकर लड़ा गया। ऐसे में मोदी का आभामंडल पूरे चुनावी अभियान के दौरान 'विराट' होता चला गया। मौजूदा चुनावी माहौल में जो कटुता देखने को मिली, उस बारे में मोदी का क्या नजरिया है? यदि मोदी पीएम बनते हैं, तो उनका विकास का रोड मैप क्या होगा? मोदी से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गुलशन राय खत्री और नरेंद्र नाथ ने ऐसे ही कई अहम सवाल पूछे, पेश है खास अंशः

1-एनबीटीः चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों में कड़वाहट बढ़ी है। क्या इससे बचा जा सकता था? क्या आने वाले दिनों में इसका असर सरकार और विपक्ष के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है?

नरेंद्र मोदीः यह बात सही है कि जैसे-जैसे चुनावी प्रचार परवान चढ़ता गया, भाषणों और वक्तव्यों में हमारे विरोधियों ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं, खासकर शुरुआती राउंड में भारी पोलिंग के बाद सहमे कांग्रेस और उसके साथी दलों ने गाली-गलौज करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। शुरुआत में हमने यह तय किया था कि इस पूरे चुनाव को विकास और सुशासन जैसे सकारात्मक मुद्दों पर लड़ेंगे। यदि अन्य राजनीतिक दल भी इस पहल में हमारा साथ देते तो शायद भारतीय चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ जाता। लेकिन अफसोस, हमारे विरोधी दलों ने चुनाव को उसी पुरानी जाति और संप्रदाय की राजनीति की तरफ धकेलने में ही अपना सारा जोर लगा दिया। इसके बावजूद यह पहला चुनाव है जिसमें बीजेपी जैसी कोई बड़ी पार्टी विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। पिछले छह महीने से मेरा यह ईमानदार और गंभीर प्रयास रहा है कि हम नागरिकों के असली मुद्दों को उठाएं।

मीडिया का यह कहना कि चुनाव के दौरान पैदा हुई कटुता का प्रभाव चुनाव के बाद भी देखने को मिलेगा, एक अतिशयोक्तिपूर्ण सोच है। दरअसल, जमीनी हकीकत ऐसी नहीं है। अक्सर आपने देखा होगा कि चुनावी समर में एक-दूसरे पर तीखे वार करने वाले नेता जब अनायास किसी हवाई अड्डे पर मिलते हैं, तब उनके बीच बड़े ही सहज ढंग से बातचीत होती है। ऐसा नहीं है कि चुनावी जंग की तल्खियां राजनेताओं के आपसी रिश्ते पर हावी हो जाती है। गर्मजोशी के साथ मिलने के बाद जब वे फिर रैलियों में पहुंचते हैं तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। यह समझना होगा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा तो होती है, लेकिन दुश्मनी कतई नहीं। एक अहम बात और कहना चाहूंगा। इधर, पिछले कुछ समय से सार्वजनिक जीवन में व्यंग्य और विनोद का चलन खत्म-सा होता जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में गंभीरता के साथ-साथ व्यंग्य और विनोद का होना भी जरूरी है, आपसी रिश्तों में उदासीनता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

मालूम हो कि व्यंग्य, कार्टून तथा लतीफों की दुनिया में भी हम राजनेताओं की मौजूदगी व्यापक स्तर पर होती है। इन दिनों 'मॉरल पुलिसिंग' का दौर भी चल रहा है। एक हद तक तो यह सही है, लेकिन इसका अतिरेक निश्चित ही गैरजरूरी प्रतीत होता है। जहां तक आने वाले दिनों में इसके असर की बात है तो हम न तो बदले की भावना से कोई काम करेंगे और न ही चुनावी प्रतिद्वंद्विता को चुनाव पश्चात आगे ले जाएंगे। हम पूरी शालीनता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और हमारे विरोधियों के साथ भी आपसी सहयोग से देश के विकास के लिए कार्यरत रहेंगे।

2-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आते हैं तो यह देश आपसे क्या उम्मीद करे? आप विपक्ष को किस तरह से साथ लेकर चलेंगे और विपक्ष को साथ लेकर चलने के लिए क्या कदम उठाएंगे?

नरेंद्र मोदीः हम इतना सुनिश्चित करेंगे कि लोगों की जो आशाएं और अपेक्षाएं हमसे जगी हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पुरजोर मेहनत करेंगे। हमारा यह प्रयास होगा कि देश का विकास करने और सुशासन प्रदान करने के लिए हम दिन-रात कार्यरत रहेंगे। देश की प्रगति और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरुक विपक्ष का होना आवश्यक है। मुद्दों के आधार पर विरोध की गुंजाइश को समझा जा सकता है। इसके लिए हम खुले मन से चर्चा को तैयार रहेंगे। देश हित में आम राय बनाकर चलना हमारी कार्यशैली का हिस्सा होगा।

3-एनबीटीः इस देश में 90 के दशक में उदारवादी आर्थिक नीतियां शुरू हुई थीं। क्या ये आगे भी जारी रहेंगी या फिर वक्त के साथ इनमें कुछ बदलाव करने की जरूरत है?

नरेंद्र मोदीः कोई भी देश या समाज यदि एक ही जगह स्थिर रह जाए तो वह विकास नहीं कर सकता। समयानुरूप बदलाव की आवश्यकता हर देश में होती है। अर्थव्यवस्था में भी निरंतर गति बनाए रखने के लिए सुधार जरूरी है। हम हर उस कदम को उठाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था सुधरे, विकास की गति बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों।

4-एनबीटीः जीएसटी और मल्टी-ब्रांड रिटेल  में एफडीआई पर आपकी क्या राय है? क्या यह होना चाहिए या नहीं?

नरेंद्र मोदीः जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी का सरल और बेहतर उपाय है। राज्यों को मिलने वाली सहायता राशि में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने की वजह से जीएसटी स्थगित हो गया है। लेकिन हमारी सरकार जीएसटी की सभी बाधाओं और उसमें होने वाले करप्शन और अनुचित देरी की संभावनाओं को दूर करने के लिए सकारात्मक भूमिका अदा करेगी। जीएसटी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आईटी नेटवर्क का देशव्यापी ढांचा खड़ा करना जरूरी है, मगर यूपीए सरकार ने इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया। तमाम अहम मामलों में देरी या कहें कि 'पॉलिसी पैरालिसिस' की स्थिति के लिए राज्य सरकारों को बदनाम करने की यूपीए सरकार की बीमार मानसिकता रही है। मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई का जहां तक सवाल है, हमारी पार्टी का आधिकारिक रुख हमारे मेनिफेस्टो में साफ कर दिया गया है।

5-एनबीटीः आप अक्सर देश में बुलेट ट्रेनें चलाने और सौ नए शहर बसाने की वकालत करते रहे हैं। इससे देश का आर्थिक विकास तो तेज होगा, लेकिन इसके लिए भारी-भरकम राशि का इंतजाम कहां से होगा? मुंबई-अहमदाबाद के बीच ही एक बुलेट ट्रेन चलाने के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है तो क्या इस तरह की बुलेट ट्रेनें देश भर में चलाने पर वे आर्थिक लिहाज से कामयाब होंगी?

नरेंद्र मोदीः हमारे देश का दुर्भाग्य यह है कि अब तक जिस प्रकार की सरकारें यहां चलाई गईं, उसमें मानों गरीबी एक अभिशाप नहीं वरन एक वरदान हो, एक आवश्यकता हो। भले वह चाहे वोट बैंक की राजनीति के लिए हो या सत्तारूढ़ राजनेताओं में दीर्घदृष्टि के अभाव चलते हो। नतीजा यह, कि हम न कुछ बड़ा सोच पाते हैं, न कुछ विश्वस्तरीय करने का प्रयास करते हैं। दूसरी तरफ, आजादी के समय भारत जैसी ही हालात वाले साउथ कोरिया जैसे छोटे देश एक व्यापक सोच के कारण विकास की बुलंदियों को छू रहे हैं। अटल जी की सरकार में स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं को लागू करने की एक अहम शुरुआत हुई। वह एक प्रयास था कि भारतीय नागरिकों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जाए। दुर्भाग्यवश पिछले दस साल में हम उस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय बहुत पीछे धकेल दिए गए हैं। मेरा मानना है कि यदि हमारा विजन बड़ा हो, उसके अनुरूप पुरुषार्थ करने की क्षमता और तैयारी हो तो हमारा देश भी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। हम भी अपने नागरिकों को क्रमशः हर क्षेत्र में वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा सकते हैं। रही पैसों की बात मुझे नहीं लगता कि मौजूदा समय में ऐसी योजनाओं के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है।

6-एनबीटीः पाक समेत पड़ोसी देशों के साथ इस वक्त भारत के रिश्तों की आपको जानकारी है? क्या इन रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए आपके दिमाग में कोई योजना है? यदि हां, तो वह क्या है?

नरेंद्र मोदीः आज जब आतंकवाद ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है और हमारा देश भी कई मोर्चों पर इससे मुकाबला कर रहा है। ऐसे में, यह जरूरी हो जाता है कि एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते की बुनियाद आतंकवाद के खिलाफ साथ मिलकर लड़ने की रणनीति पर रखी जाए। जब तक कोई भी पड़ोसी देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देगा तब तक उसके साथ अच्छे रिश्ते बनाना मुश्किल है। मेरा मानना है कि हमारी विदेश नीति आपसी सम्मान और भाईचारे पर आधारित होनी चाहिए। इसी तरह अन्य देशों के साथ हमारे संबंध भी बराबरी और परस्परता पर आधारित होने चाहिए। देश हित सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। हम न किसी को आंख दिखाना चाहते हैं और न ही चाहते हैं कि कोई हमें आंख दिखाए। हम चाहते हैं आंख से आंख मिलाकर बात करें।

7-एनबीटीः केंद्र और राज्यों के बीच भी आप पीएम और सीएम टीम की बात करते रहे हैं, लेकिन क्या राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों के होते हुए भी यह संभव है? यदि हां, तो केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को किस तरह से और कौन सी नई शक्ल देंगे?

नरेंद्र मोदीः मेरी सोच के मुताबिक टीम इंडिया में प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्री शामिल होने चाहिए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री साथ मिलकर बतौर टीम काम करें। यदि सब साथ मिलकर काम करें, तभी हम सही मायने में प्रगति कर सकते हैं। सारी निर्णय प्रक्रिया में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाया जाए। बड़े प्रॉजेक्ट को मंजूरी के वक्त राज्य सरकार को भी साथ रखा जाए। यह हमारी प्राथमिकता होगी कि सभी राज्यों को विकास की प्रक्रिया में बराबर का साझीदार समझा जाए। जब हम भागीदारी की बात करते हैं, तो इससे हमारी साफ नीयत का पता चलता है। यदि नीयत सही है, तो राज्यों में विपक्षी दल की सरकार का होना रुकावट की वजह नहीं बनेगा।

8-एनबीटीः इस वक्त महंगाई की मार से देश के लोग त्रस्त हैं। महंगाई, राज्य सरकारों की पहल के बिना खत्म नहीं हो सकती। ऐसे में राज्यों को इसके लिए कैसे तैयार करेंगे?

नरेंद्र मोदीः महंगाई को नियंत्रित करने के लिए डिमांड-सप्लाई मिसमैच यानी कि मांग-आपूर्ति के असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए खाद्यान्न और अन्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धि सुनिश्चित कराना जरूरी है। यह तभी संभव हो पाएगा, जब कृषि पर आवश्यक बल दिया जाए और सिंचाई सुविधाओं का विकास किया जाए। इस बारे में एक नई सोच के साथ काम करने की जरूरत है। हमारी पार्टी के मेनिफेस्टो में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार के लिए 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, आज हमारे देश में कृषि क्षेत्र का कोई रीयल टाइम डेटा उपलब्ध नहीं है। लिहाजा, कृषि विकास के लिए योजनाएं बनाने का कोई सटीक मतलब नहीं रह जाता। हम कृषि क्षेत्र का रीयल टाइम डेटा हासिल कर उसके मुताबिक पॉलिसी और प्रोग्राम बनाएंगे। खाद्यान्न की कीमतों को स्थिर रखने के लिए विशेष फंड बनाया जाएगा। हम गुजरात की श्वेत क्रांति का देशभर में प्रसार करना चाहेंगे।

9-एनबीटीः इस वक्त देश की जनता की इतनी सारी उम्मीदें आपसे जुड़ गई हैं। क्या आपको इन उम्मीदों का बोझ महसूस होता है? इन पर खरा उतरने के लिए आपकी क्या तैयारी है?

नरेंद्र मोदीः दरअसल, पिछले दशकों के दौरान राजनीति के स्तर में जो गिरावट आई है, उसके चलते सरकारों के प्रति आम जनमानस में निराशा और तिरस्कार की भावना बन गई थी। बड़े लंबे समय बाद चुनावी राजनीति में लोगों की दिलचस्पी वापस आई है, मतदाताओं का भरोसा पुनःस्थापित होता दिख रहा है। समूचे देश में एक आशा का संचार हुआ है। मुझे इस बात का अहसास है कि बीजेपी से देशभर में बहुत ज्यादा उम्मीदें बांधी जा रही हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अपने नागरिकों को भी सपने संजोने का हक है, आशावादी होने का अधिकार है। उम्मीदें बांधने की इजाजत होनी चाहिए, इसमें कुछ बुरा नहीं है। इन सारी बातों का हमें पूरा ख्याल है और उसी के अनुसार कठिन से कठिन परिश्रम करने की मानसिक तैयारी हम कर चुके हैं।

10-एनबीटीः विदेश से काला धन लाना आसान नहीं है? कई विदेशी कानून इसमें अड़चन बने हुए हैं। आप इन्हें कैसे दूर करेंगे और यदि काला धन वापस आता है तो इससे देश के लोगों को क्या फायदा होगा? आपकी नजर में कितना काला धन हो सकता है?

नरेंद्र मोदीः सबसे पहली बात है काला धन वापस लाने की मंशा और संकल्पशक्ति। बीजेपी ने काले धने को वापस लाने की अपनी मंशा साफ तौर पर व्यक्त की है। हम मानते हैं कि काले धन की समस्या एक बड़ी चुनौती है। यह सिर्फ टैक्स चोरी ही नहीं बल्कि देशद्रोही प्रवृत्ति भी है। काला धन जो पैदा हुआ है और विदेशों में जमा हो रहा है, वह आगे चलकर गैर-कानूनी और देशद्रोही गतिविधियों की दिशा में चला जाता है। हमारे लिए यह अत्यंत अहम मुद्दा है। मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि काला धन वापस लाने की मेरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है और हम तत्काल ही एक टास्क फोर्स का गठन करेंगे और इसके लिए जरूरी कानूनी सुधार के साथ-साथ कानूनी फ्रेमवर्क-ढांचे में जरूरी बदलाव भी लाएंगे। इतना ही नहीं, देश में ऐसा काला धन वापस लाकर उसका आंशिक हिस्सा ईमानदार करदाताओं विशेषकर सैलरीज क्लास के टैक्स पेयर्स को प्रदान करेंगे। यह जरूरी है कि हमारी कर-व्यवस्था-टैक्स सिस्टम ईमानदार टैक्स पेयर्स को प्रोत्साहन और इनाम देने वाली कर चोरों के खिलाफ सख्ती से पेश आने वाली हो।

11-एनबीटीः इस वक्त लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में है? आपको क्या लग रहा है कि अगली लोकसभा का सीन क्या रहने वाला है?

नरेंद्र मोदीः अब तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है कि देश की जनता बदलाव चाहती है। महंगाई, भ्रष्टाचार और घोटालों के दलदल में फंसी यूपीए सरकार ने देशवासियों को सिवाय नाउम्मीदी के कुछ और नहीं दिया। अब तक 9 में से 8 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। और इन चरणों में हुए मतदान के रुझान से साफ हो गया है कि यूपीए सरकार का सत्ता से जाना वोटरों ने तय कर दिया है। वहीं, बीजेपी और साथी दलों की सरकार की नींव भी रख दी गई है। अब सिर्फ 41 सीटों पर पोलिंग होनी है। मुझे आशा है कि देश के अन्य राज्यों की ही तरह जहां मतदान होना बाकी है, वहां मतदाता बीजेपी और साथी दलों को अपार समर्थन देने वाले हैं।

12-एनबीटीः आप कहते हैं कि कांग्रेस का आंकड़ा दहाई तक ही पहुंच पाएगा तो आपको क्या लगता है कि सबसे बड़ा विपक्षी दल कौन होगा?

नरेंद्र मोदीः जी हां! इन चुनावों में कांग्रेस अपने चुनावी इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन का एक नया रेकॉर्ड बनाने जा रही है। बहुत संभव है कि वह दहाई के आंकड़े तक ही सिमट कर रह जाएगी। इन सबके बीच कांग्रेस के आला नेता पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने की खातिर परिस्थितियों को किस तरह मैनेज करते हैं, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। हम तो चाहते हैं कि सबसे बड़ा विपक्ष चाहे कोई भी हो, वह सकारात्मक राजनीति करे और देश की प्रगति और खुशहाली के लिए जिम्मेदार राजनीति की एक स्वच्छ परंपरा का पालन करे।

13-एनबीटीः आप कांग्रेस में किसी नेता को पीएम लायक मानते हैं? यदि हां, तो वह कौन है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, मैं समझता हूं कि आज कांग्रेस नेतृत्वविहीन पार्टी हो गई है। जनता से जुड़ा कोई कद्दावर नेता, जिसकी आवाज कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजती हो, कांग्रेस के पास नहीं है। गांधी परिवार की भक्ति और परिक्रमा ही कांग्रेस के नेताओं का एकसूत्रीय अजेंडा है। ऐसे में पीएम पद के लायक नेता ढूंढ़ना बहुत दूर की कौड़ी है। इंदिरा जी के जमाने से ही किसी नेता का कद इतना बड़ा नहीं होने दिया गया कि वह आगे चलकर गांधी परिवार के लिए चुनौती साबित हो।

14-एनबीटीः डॉ. मनमोहन सिंह को निजी तौर पर कैसे आंकते हैं? क्या वे पीएम के रूप में ही अच्छे साबित नहीं हुए या फिर निजी तौर पर उनमें अच्छे गुण भी हैं?

नरेंद्र मोदीः देखिए, किसी भी इंसान के आकलन/मूल्यांकन के लिए उसे करीब से देखना जरूरी है। डॉ. मनमोहन सिंह के साथ बहुत ज्यादा मुलाकात तो नहीं हुई। हां, कुछ आधिकारिक मुलाकातें जरूर हुई हैं, लेकिन उन चंद मुलाकातों के आधार पर मैं उनके बारे में कोई राय कायम करना उचित नहीं समझता। रही बात बतौर प्रधानमंत्री उनके आकलन की तो उनके निराशाजनक कार्यकाल को देखकर देश हकीकत समझ चुका है।

15-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आए तो वे ऐसे पांच काम कौन से हैं, जो आप सबसे पहले करना चाहेंगे?

नरेंद्र मोदीः सरकार और सरकारी व्यवस्था में भरोसा लौटाना हमारा पहला काम होगा। दूसरा, अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कारगर कदम उठाना हमारी प्राथमिकता होगी। तीसरा, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे और चौथा, सरकारी व्यवस्था में जान फूंकना और निर्णय प्रक्रिया को कारगर बनाना होगा। पांचवां काम पॉलिसी पैरालिसिस से निजात पाना होगा।

16-एनबीटीः क्या आपको लगता है कि आपके पीएम पद तक पहुंचने की राह में कोई रुकावट बन सकता है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, एक सामान्य परिवार का बेटा आज यहां तक पहुंचा है। इस लंबे सामाजिक और राजनीतिक सफर में न जाने कितने लोगों का समर्थन, आशीर्वाद और दुआएं मुझे मिली हैं। मैं समझता हूं यह एक काल्पनिक सवाल है, जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

17-एनबीटीः वाजपेयी जी की याद आती है? क्या आपकी सरकार में उनके कामकाज की छवि नजर आएगी?

नरेंद्र मोदीः बीजेपी का एक सिपाही होने के नाते निश्चित रूप से वाजपेयी जी की याद तो आती ही है। भारत के इतिहास में एकमात्र पूर्णकालिक गैर-कांग्रेसी सरकार चलाने का यश उन्हें जाता है। आम जनता को ध्यान में रखते हुए ऐसे कई कार्य वाजपेयी जी ने किए थे, जो आज भी याद किए जाते हैं। चूंकि मैंने अपना राजनीतिक सफर वाजपेयी जी की छत्रछांव में ही तय किया है, लिहाजा यह लाजिमी है कि काम करने की उनकी विशिष्ट शैली और आम जनता से हमेशा सरोकार रखने की उनकी शिद्दतभरी आतुरता का मैं कायल रहा हूं। सबसे बड़ी बात, कांग्रेस शासनकाल में महंगाई से त्रस्त देश की जनता को जिस तरह से वाजपेयी जी की सरकार ने राहत दी थी, हम चाहेंगे कि आम जन को यह राहत एक बार फिर से मिले।

Courtesy: Navbharat Times

 

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নয়াদিল্লি: প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি বিস্তৃত সাক্ষাতকার দিয়েছেন নেটওয়ার্ক এইটিন-এর গোষ্ঠী-সম্পাদকরাহুল যোশিকে, যেখানে রাজনীতি, অর্থনীতি, দলিতদের ওপর সাম্প্রতিক আক্রমণের পরবর্তীতে তাঁর সরকারের সমালোচনা, ভোট-ব্যাঙ্কের রাজনীতি ও জাতিভেদ নিয়ে বহুমুখী আলোচনারপাশাপাশি তাঁর নিজের ভেতরে, তাঁর কাজের শৈলীতে ও তাঁর আন্তরিক বিশ্বাসের মধ্যেউঁকি দেওয়া হয়েছে, যা অত্যন্ত বিরল|

প্রশ্ন: শুরুতেই নেটওয়ার্ক এইটিনকেসাক্ষাত্কার দেওয়ার জন্য আপনাকে ধন্যবাদ| দু’বছর আগে আপনি ঐতিহাসিক জনসমর্থন নিয়েনির্বাচিত হয়েছিলেন, তিন দশকের মধ্যে যা সবচেয়ে বেশি নির্ণায়কমূলক| এই গত দু’বছরকেআপনি কীভাবে দেখেন এবং আপনি কোন বিষয়টিকে সবচেয়ে বড় সাফল্য বলে মনে করেন?

পিএম মোদি: প্রধানমন্ত্রীহিসেবে দায়িত্ব পাওয়ার পর প্রায় দু’বছর তিনমাস হয়ে গেছে| ভারত গণতান্ত্রিক দেশ এবংমানুষ সরকারকে নিয়মিতভাবে মূল্যায়ন করেন| প্রচার মাধ্যমও মূল্যায়ন করে থাকে| এবংএখন পেশাদার সমীক্ষাকারী সংস্থাগুলিও মূল্যায়ন করে| এবং আমি মনে করি এটা একটা ভালোবিষয় এবং সেকারণে আমার সরকারের কাজকর্মের মূল্যায়ন করার বিষয়টি আমি জনগণের ওপরছেড়ে দেই| কিন্তু আমি অবশ্যই চাই যে, যখনই আমার সরকারের মূল্যায়ন হবে, তখন আমরাক্ষমতায় আসার আগে সরকারের অবস্থার বিষয়টি অবশ্যই মাথায় রাখতে হবে, বুঝতে হবে দেশেরঅবস্থা কী ছিল ও প্রচার মাধ্যম কী আলোচনা করত| যদি আমরা তা মাথায় রাখি, তাহলেদেখতে পাবো সেই দিনগুলিতে সংবাদপত্র দুর্নীতি, হতাশার সংবাদে পূর্ণ হয়ে থাকত…মানুষ আশা হারিয়ে ফেলেছিলেন, তাঁরা ভাবতেন সবকিছু রসাতলে চলে গেছে|

যতভালো চিকিত্সকই হোক রোগী যদি নিরাশাগ্রস্ত হয়, তাহলে ওষুধ তাঁকে সুস্থ করতে পারবেনা| কিন্তু রোগী যদি আশান্বিত হয় তাহলে মোটামুটি মানের চিকিত্সকও তাঁকে সুস্থ করেতুলতে পারেন| এর কারণ হচ্ছে রোগীর অন্তরের বিশ্বাস|

সরকারগঠনের পর আমার প্রাথমিক অগ্রাধিকার ছিল এই হতাশাজনক আবহাওয়া সরিয়ে দিয়ে দেশে আশা ওবিশ্বাসের পরিবেশ তৈরি করা| এটা বক্তৃতা দিয়ে হয়না| সুনির্দিষ্ট পদক্ষেপ গ্রহণ করাপ্রয়োজন, আর তা করে দেখানো হয়েছে| এবং আজ দু’বছরের বেশি সময়ের পর, আমি নিশ্চয়তারসঙ্গে বলতে পারি যে, শুধুমাত্র দেশের জনগণের মধ্যেই যে আশা তৈরি হয়েছে তা নয়,ভারতের ওপর গোটা বিশ্বের বিশ্বাস বৃদ্ধি পেয়েছে|

একটা সময় ছিল যখন আমাদেরকে ডুবন্ত জাহাজ হিসেবে দেখা হত| ব্রিকস-এর ‘আই’ (ইন্ডিয়ারআদ্যক্ষর)-কে টলমল হিসেবে দেখা হত| আজ বলা হচ্ছে যে যদি কোনো উজ্জ্বল কেন্দ্র থেকেথাকে, তাহলে তা ভারত| আমি মনে করি এটা নিজে থেকেই মূল্যায়ন করার ভালো পদ্ধতি|

প্রশ্ন: আপনি উন্নয়নের ইস্যু নিয়েক্ষমতায় এসেছেন, তাই অর্থনীতি নিয়ে একটি প্রশ্ন| অনেক প্রচেষ্টার পর আপনিজি.এস.টি. বিল পাশ করাতে সক্ষম হয়েছেন| এটাকে আপনি কতবড় সাফল্য বলে মনে করেন|সাধারণ মানুষের কাছে এর গুরুত্ব কতখানি?

পিএম মোদি: এটাসম্ভবত ভারতের স্বাধীনতার পর থেকে সবচেয়ে বড় কর-সংস্কার| এই সংস্কার ভারতে একবিরাট পরিবর্তন নিয়ে আসবে| দেশের খুব কম সংখ্যক মানুষই কর প্রদান করে থাকেন| কিছুমানুষ কর দিয়ে থাকেন, কারণ তাঁরা দেশপ্রেমিক এবং তাঁরা দেশের জন্য কিছু করতে চান| আরওকিছু মানুষ কর দেন, কারণ তাঁরা আইন ভঙ্গ করতে চান না| কেউ কেউ কর দেন সমস্যা এড়িয়েচলার জন্য| কিন্তু বেশিরভাগ মানুষ কর দেন না কারণ এই প্রক্রিয়াটি খুবই জটিল| তাঁরামনে করেন এই পদ্ধতিতে তাঁরা আটকে যাবেন এবং আর বেরিয়ে আসতে পারবেন না| জি.এস.টি.কর-প্রদানকে এত সরলীকরণ করবে যে, দেশের জন্য যিনি কিছু করতে চান, তিনিই এগিয়ে আসবেন|

দ্বিতীয়ত,বর্তমানে আপনি যদি কোনো হোটেলে যান এবং খাওয়া দাওয়া করেন, তাহলে আপনার বিলের সঙ্গেথাকবে এই সেস ওই সেস…| মানুষ বিলের পরিমাণ ও প্রদত্ত সেস-এর বিস্তারিত জানিয়েহোয়াটসঅ্যাপ-এর মাধ্যমে মেসেজ পাঠান| এ সমস্ত কিছু শেষ হয়ে যাবে| এবং আমরানিয়মিতভাবে দেখতে পাই কর দেওয়ার জন্য শহরের প্রবেশদ্বারে শুল্ক আদায় কেন্দ্র এবং সীমান্তচেকপোস্টে মাইলের পর মাইল জুড়ে গাড়ি দাঁড়িয়ে আছে| যখন গাড়ি দাঁড়িয়ে যায়, তা দেশেরঅর্থনীতিকে আঘাত করে| এখন এক রাজ্য থেকে অন্যরাজ্যে পণ্যের যাওয়া-আসা, এই সমস্তকিছু হবে বাধাহীনভাবে|

করআরোপের ব্যবস্থাও সরলীকরণ হবে এবং তা শুধু সাধারণ মানুষেরই উপকার করবে না, এই রাজস্বসহায়তা করবে দেশের উন্নয়নেও| এখন রাজ্যগুলির মধ্যে অবিশ্বাসের ঘটনা ঘটছে| এইঅবস্থারও সমাপ্তি হবে, এটা হবে স্বচ্ছ এবং তা যুক্তরাষ্ট্রীয় কাঠামোকে শক্তিশালীকরবে|

প্রশ্ন: ক্ষমতায় আসার পর, আপনারসবচেয়ে বড় প্রতিকুলতা ছিল অর্থনীতি| আপনার সামনে একে আবার পুরনো গতিতে নিয়ে আসারকাজের সঙ্গে প্রবৃদ্ধির গতি বৃদ্ধির কাজও ছিল| আপনি তা অর্জন করতে সমর্থ হয়েছেনকী?

পিএম মোদি: আপনিসঠিক বলেছেন যে, একটা নেতিবাচক আবহাওয়া ছিল| দেশের ব্যবসায়ী ও শিল্পপতিরা অন্যকোথাও গিয়ে কাজ শুরু করার কথা ভাবতে শুরু করেন| সরকারের মধ্যে পক্ষাঘাতগ্রস্ততাদেখা দেয়| একদিকে এটা যেমন ছিল অবস্থা, তেমনি আমাদের পরপর দু’টি খরার মুখোমুখি হতেহয়েছিল| তৃতীয়ত, বিশ্ব-অর্থনীতিতে একটা মন্দাভাব এসেছিল| তাই বেশকিছু প্রতিকুলতাইতখন ছিল| আমাদের দায়িত্ব নেওয়ার সময়েই শুধু নয়, তার পরও অনেক প্রতিকুলতা ছিল|কিন্তু আমাদের উদ্দেশ্য ছিল শক্তিশালী এবং নীতি ছিল স্পষ্ট| আগে সিদ্ধান্তহীনতাছিল, কেননা কোনো কায়েমী স্বার্থের বিষয় ছিল না| যার ফলে এই ইতিবাচকতা খুব দ্রুত ছড়িয়েপড়ে|

এখন,আমাদের স্বাধীনতার পরবর্তী পর্যায়ে সবচেয়ে বেশি পরিমাণে প্রত্যক্ষ বিদেশি বিনিয়োগ|গোটা বিশ্ব বলছে, ৭% প্রবৃদ্ধি নিয়ে আমরা দ্রুততম প্রবর্ধমান অর্থনীতি|বিশ্বব্যাঙ্ক, আই.এম.এফ., ক্রেডিট সংস্থা, এমনকি রাষ্ট্রসংঘের সংস্থাগুলি… সবাইবলছে ভারত দ্রুতগতিতে এগিয়ে যাচ্ছে|

তাই প্রবৃদ্ধিতে সহায়তাকারী নীতিগুলিকে বেশি গুরুত্ব দেওয়া হচ্ছে| নীতির মাধ্যমে সমস্তরকম বাধা সরিয়ে দেওয়া হচ্ছে| এই সমস্ত কিছুই অর্থনীতিতে গতি এনেছে| এ বছরবৃষ্টিপাতও ভালো হয়েছে এবং তা কৃষি ক্ষেত্রে সহায়তা করেছে, যা অর্থনীতির চালিকাশক্তি|এটা আশার সঞ্চার করেছে যে, আগামী দিনগুলি আরও ভালো হবে|

সাধারণতদু’-একটি ক্ষেত্রে এটা বলা হয়ে থাকে, কিন্তু এখন প্রবৃদ্ধির বিষয়টি সমস্ত ক্ষেত্রেইবলা হচ্ছে| বিদ্যুতের উৎপাদন বেড়েছে এবং চাহিদাও বেড়েছে| পরিকাঠামোর কাজও দ্রুতগতিতেবেড়ে চলেছে এবং এটা তখনই হয়যখন অর্থনীতিতে চাহিদা থাকে| এই সমস্ত কিছু দেখে মনেহচ্ছে আমরা ভালো দিনের দিকে এগিয়ে যাচ্ছি|

প্রশ্ন: আপনিএকেবারেই সঠিক যে বর্ষা মরসুম খুবউত্সাহজনক এবং স্টক মার্কেটেও উর্ধগতি| আপনি কি আমাদের বলবেন এবার পরবর্তী সংস্কারকোন ক্ষেত্রে হবে?

পিএম মোদি: প্রথমত, আমাদের দেশে যা নিয়ে বলা হয় তাকেইসংস্কার হিসেবে বলা হয়| যেক্ষেত্রে কিছু বলা হবে না, তাকে সংস্কার হিসেবে দেখা হবেনা| এটা আমাদের অজ্ঞতাকেই প্রকাশ করে| আসলে আমার দৃষ্টিভঙ্গি হচ্ছে সংস্কার থেকে রূপান্তর|আমি বলি, আমার সরকারের মধ্যে –– সংস্কার, সম্পাদন ও রূপান্তর| এবং যেহেতু আমি একসাক্ষৎকারের জন্য বসেছি, তাই আমি বলব সংস্কার, সম্পাদন, রূপান্তর ও জ্ঞাপন|

যেমন ধরুন বাণিজ্য-বান্ধব পরিবেশের বিষয়টি| ক্রমতালিকায় আমাদের স্থান দ্রুত উপরে উঠছে|এটা সংস্কার ছাড়া সম্ভব নয়| আমাদের পদ্ধতি, প্রণালী ও ফর্ম খুবই জটিল ছিল| এগুলোকেসংস্কার করা হয়েছে, তাই আমাদের র‍্যাঙ্কিং উপরের দিকে উঠছে| রাষ্ট্রসংঘের একটিসংস্থা বলেছে যে, আগামী দুই বছরে আমরা দশম স্থান থেকে তৃতীয় স্থানে উঠে আসতে পারি|এই ছোটো-খাটো বিষয়গুলিকে উন্নত করা প্রয়োজন| এমনকি আজও কিছু কিছু ক্ষেত্রেলাইসেন্স রাজ রয়ে গেছে| এগুলো শেষ হওয়া প্রয়োজন| এটা একটা গুরুত্বপূর্ণ সংস্কার যাপ্রশাসনিক, শাসন প্রক্রিয়া, আইনগত সমস্ত ক্ষেত্রে হচ্ছে|

উদাহরণ হিসেবে বলা যায়, আমরা উনবিংশ ও বিংশ শতাব্দীর ১৭০০ টি আইন তুলে দিয়েছি| আমিরাজ্যগুলিকেও তা করার জন্য বলেছি| এগুলো হচ্ছে বড় মাপের সংস্কার যেগুলোকে মানুষতথ্যের অভাবে সংস্কার হিসেবে মনে করেন না|

যেমনধরুন শিক্ষা, যেখানে আমরা গুরুত্বপূর্ণ পদক্ষেপ গ্রহণ করেছি কিন্তু কেউ সেভাবেগুরুত্ব দিচ্ছে না| আমরা বলেছি যে দশটি সরকারি ও দশটি বেসরকারি বিশ্ববিদ্যালয়কেবিশ্ববিদ্যালয় মঞ্জুরি কমিশনের নিয়ম থেকে মুক্ত করে দেওয়া হবে| আমরা সেগুলোকে অর্থযোগান দেব এবং তাদেরকে বিশ্বমানের বিশ্ববিদ্যালয় হওয়ার জন্য এগিয়ে যেতে হবে| যদিনিয়মকানুন দিয়ে তাদেরকে হয়ে থাকে দিয়ে থাকে, তাহলে আমরা সেই নিয়মকানুন উঠিয়ে দেব|এবার তা করে আমাদের দেখাও| এটা একটা বড় সংস্কার, কিন্তু সেভাবে গুরুত্ব পাচ্ছে না|

সরাসরিসুবিধা হস্তান্তর (ডি.বি.টি.) হচ্ছে আরেকটি বড় সংস্কার| আগে এম.এন.রেগা’র অর্থকোথায় যাচ্ছে কে জানত? এখন তা ডি.বি.টি.’র মাধ্যমে দেওয়া হচ্ছে| একইভাবে দেওয়াহচ্ছে গ্যাসের ভর্তুকি ও ছাত্রছাত্রীদের বৃত্তির অর্থও| আমার কাছে এগুলো সবই হচ্ছেশাসন প্রক্রিয়া ও স্বচ্ছতায় সংস্কার| আমরা আরও প্রযুক্তি পাচ্ছি| এগুলোকে ব্যাপকমাত্রায় করতে হবে| এগুলোর কেন্দ্রে রয়েছে সাধারণ মানুষ| সাধারণ মানুষের জীবনযাত্রাকীভাবে আরও সহজ করে তোলা যায়, কীভাবে তাঁরা তাঁদের অধিকার পাবেন, আমরা সেসবক্ষেত্রেই জোর দিতে চাই|

প্রশ্ন : আর্থিক প্রবৃদ্ধি সত্বেও আমাদের দেশে বেসরকারিবিনিয়োগ এখন্ও মোটামুটি পর্যায়ে রয়ে গেছে। রিয়েল এস্টেটের মত কিছু কিছু ক্ষেত্রএখনও সমস্যায় রয়েছে। স্টার্টআপ -এর মূলধন তহবিলউদ্যোগে গতি কমে গেছে। এই সন্ধিক্ষণে আপনি বেসরকারি শিল্প ও বিদেশি বিনিয়োগকারীদেরকী বার্তা দিতে চান ?

পিএম মোদি: আজ আমি ভাবছি , প্রথম বাজেট বরাদ্দ পেশ করার আগে দেশের আর্থিক অবস্থা নিয়েএকটি শ্বেতপত্র সংসদে পেশ করা উচিত ছিল। তখন এই চিন্তাটা আমাকে আঁকড়ে ধরেছিল। আমারসামনে তখন ছু ’টি পথই খোলা ছিল। রাজনীতি আমাকে বলছিল সমস্তকিছু বিস্তারিত আমার প্রকাশ করা উচিত। কিন্তু দেশের স্বার্থ আমাকে বলছিল যে ,এসব তথ্য আশাহীনতার বোধ বৃদ্ধি করবে , বাজারেএতে খারাপভাবে আঘাত আসবে , আর্থিক ক্ষেত্রে তা হবে এক বিরাটআঘাত এবং ভারত সম্পর্কে বিশ্বের ধারণাও এতে খারাপ হয়ে যাবে। অর্থনীতিকে এর বাইরেনিয়ে আসাটা খুবই কঠিন হতো । আমি দেশের স্বার্থে রাজনৈতিক ক্ষতি সত্বেও এক্ষেত্রে নীরব থাকাটা বেছে নেই। সেসময় সরকারি ব্যাঙ্কগুলির অবস্থা ছিল খুব খারাপ। আমি সেগুলো জনগণের সামনে নিয়ে আসিনি। এটা আমাদের আঘাত করে, আমরা সমালোচিত হই , এমনভাবেদেখানো হয় যেন সবকিছু আমারই ভুল। কিন্তু আমি দেশের স্বার্থে রাজনৈতিক ক্ষতিস্বীকার করে নেই।

আগের সমস্ত বিষয়ের প্রভাব বেসরকারি বিনিয়োগের অপর প্রভাব ফেলে , ব্যাঙ্কের অকার্যকর সম্পদের মত। আমি ব্যাঙ্কারদের সঙ্গেআলোচনা করি এবং তাদেরকে বলি যে , সরকারের পক্ষ থেকে তাদেরকে কোনো বাধা দেওয়া হবে না। এইপদক্ষেপগুলি বিষয়টিকে দৃঢ় সংবদ্ধ করেছে।

এগুলো ছাড়া্ও সড়ক নির্মাণের গতি , রেলপথসম্প্রসারণের পরিমান , বৈদ্যুতিন সামগ্রী নির্মাণে ছয়গুনবৃদ্ধি … এগুলো প্রমান করছে যে আমরা কোনো সংক্ষিপ্ত পথ গ্রহণকরিনি। এবং আমার আদর্শ হচ্ছে , রেলের প্ল্যাটফর্মে যেভাবেলেখা থাকে : ‘সংক্ষিপ্ত পথ আপনাকে সংক্ষিপ্ত করে দেবে ’ । (শর্ট কাট উইল কাট ইউ শর্ট)। আমরা কোনোসংক্ষিপ্ত পথ নিতে চাই না এবং এর ফলে এখন দেখা যাচ্ছে।

যাই হোক পরিস্থিতি এখন অনেকটা উন্নত হয়েছে। এই বিষয়গুলি নিয়ে আমাদের এখন আরউদ্বিগ্ন হতে হবে না। কিন্তু শুরুতে -২০১৪ -এর মে মাসে আমি কঠিন পথ গ্রহণ করেছিলাম। যখন নিরপেক্ষ জনগণ অবস্থারপর্যালোচনা করবেন , আমি নিশ্চিত যে তাঁরা আশ্চর্য হয়ে যাবেন।

প্রশ্ন : কালো টাকা নিয়েআপনি কঠোর পদক্ষেপ গ্রহণ করেছেন। কার্যত বলা হচ্ছে যে কালো টাকা নিয়ে কঠোরব্যবস্থার জন্য কিছু ব্যবসায়ী দুবাই অথবা লন্ডনে গিয়ে আত্মগোপন করে আছেন। আপনিরাজনৈতিক দিক দিয়ে ক্ষমতাশালীকেও রেয়াত করেন নি। এই পদ্ধতি কি চালু থাকব ?

পিএম মোদি: প্রথমত , আমি এই বিষয়টিকে কোনো রাজনৈতিক দৃষ্টিভঙ্গি থেকে দেখিনি এবংভবিষ্যতেও এভাবে দেখব না। আমি একটি রাজ্যে চৌদ্দ বছর মুখ্যমন্ত্রী ছিলাম। আর ইতিহাসএই তথ্যেরই সাক্ষ্য বহন করে যে , আমি রাজনৈতিক বিবেচনায় কোনোফাইল খুলিনি। এরজন্য কখনও আমি অভিযুক্তও হইনি। এখানেও দু ’বছরেরবেশি সময় হয়ে গেছে। সরকার কোনো ফাইল খোলার জন্য নির্দেশ দেয়নি। আইন তার নিজের পথেইচলবে। কোনো কিছু লুকিয়ে ফেলায় প্রশ্রয় দেওয়ার অধিকার আমার নেই। আপনি বলছেন যে আমরাকোনো ক্ষমতাশালীকে রেয়াত করিনি। কথাটা এভাবে ঠিক নয়।

আমরা প্রয়োজনীয় সমস্ত আইনি পরিবর্তন করেছি , যাতেদেশের ভেতরে যে কালো টাকার প্রবাহ রয়েছে তাকেও দমন করা যায়। একটি প্রকল্প রয়েছে যা৩০শে সেপ্টেম্বর পর্যন্ত চলবে। যারা এখনও মূলস্রোতে আমায় আগ্রহী তাদের জন্য এইপ্রকল্প। আমি জনগণের সামনে বলেছি যে ৩০শে সেপ্টেম্বরই শেষ তারিখ্ আপনি যে কোনোউদ্দেশ্য নিয়েই ভুল করতে পারেন। আপনি ইচ্ছাকৃত অথবা অনিচ্ছাকৃতভাবে তা করেছেন ,এটাই আপনার সুযোগ। মূল স্রোতে আসুন। মানুষ যাতে রাতে নিশ্চিন্ত হয়েঘুমুতে পারেন , তার জন্যই এই প্রকল্প। একে অবশ্যই গ্রহন করতেহবে। এবং ৩০শে সেপ্টেম্বরের পর যদি আমি কঠোর পদক্ষেপ গ্রহণ করি , তাহলে আমাকে কেউ দোষারোপ করতে পারবেন না। এই টাকা দেশের দরিদ্র মানুষের।একে লুট করে নিয়ে যাওয়ার অধিকার কারও নেই। এটা আমার অঙ্গীকার। আমি সম্পূর্ণ শক্তি নিয়েকাজ করছে এবং এই প্রচেষ্টা চালিয়ে যাবো।

প্রশ্ন : মাননীয়প্রধানমন্ত্রী , এবার রাজনীতি নিয়ে আলোচনা করি। আগামীবছর বেশ কিছু রাজ্যে নির্বাচন হচ্ছে। সামাজিক বৈষম্য ও মৌলবাদ আবার তাদের কুৎসিতমুখ বের করছে। দলিত এবং পিছিয়ে পড়া শ্রেণির সদস্যরা বলতে শুরু করেচেন , বিজেপি ও আর এস এম হচ্ছে দলিত বিরোধী। আপনি জনগণকে কীভাবে আশ্বস্ত করবেন যে , আপনার একমাত্রবিষয় হচ্ছে উন্নয়ন এবং একমাত্র উন্নয়ন ?

পিএম মোদি: দেশবাসীর সম্পূর্ণ বিশ্বাসরয়েছে যে , আমাদের মূল বিষয় একমাত্র উন্নয়ন।জনগণের মনে কোনো সংশয় নেই। কিন্তু যেসব মানুষ কখনও চায়নি যে এধরনের কোনো সরকারক্ষমতায় আসুক , যারা চায়নি আগের সরকার চলে যাক … তাদেরই একমাত্র সমস্যা। তাই উন্নয়নই হচ্ছে আমাদের একমাত্র বিষয় এবং এটাইবজায় থাকবে। আর এটা কোনো রাজনৈতিক বিষয় নয় , এটা আমার দৃঢ়প্রত্যয়। যদি আমরা দেশকে দারিদ্র্যমুক্ত করতে চাই , তাহলেউন্নয়ন প্রয়োজন। দরিদ্রদের ক্ষমতায়ন করতে হবে।

কিছু কিছু ঘটনার প্রসঙ্গে , এগুলোর নিন্দাজানানো প্রয়োজন। কোনো সভ্য সমাজে এসবের কোনো স্থান নেই। কিন্তু আমাদের এটা ভুলেগেলে চলবে না যে আইন শৃঙ্খলা রাজ্যের এক্তিয়ারের বিষয়। কেউ কেউ বেছে বেছে ইস্যুতুলেন আর মোদিকে এরজন্য দোষারোপ করেন। আমি জানিনা যারা এসব করছে , তাদের কীলাভ হচ্ছে । কিন্তু এটা দেশের স্বার্থের ওপর আঘাত হানছে। এ ধরনের ঘটনা ঘটা উচিত নয়।পরিসংখ্যাণের দিক দিয়ে দেখা যাচ্ছে, সাম্প্রদায়িক হিংসা , দলিতদের বিরুদ্ধে নৃশংসতা অথবা উপজাতিদের বিরুদ্ধে নির্মমতার ক্ষেত্রে আগের সরকারের সময়ের তুলনায় এখন তাঅনেক কমে গেছে।

কিন্তু আগের সরকারে কি হয়েছে বা আমাদের সরকারে কী হয়েছে , তা কোনো ইস্যু নয়। বিষয় হচ্ছে আমাদের সমাজের হিসেবে এটা মানানসই নয়। আমাদের হাজার হাজার বছরের পুরনো সাংস্কৃতিক ইতিহাস। আমরা আমাদের সমাজে কিছুভারসাম্যহীনতা দেখেছি এবং এই ভারসাম্যহীনতা থেকে আমাদের সমাজকে বুদ্ধিমত্তার সঙ্গেবের করে নিয়ে যেতে হবে। এটা একটা সামাজিক সমস্যা। এর মূল অনেক গভীরে প্রোথিত।সামাজিক ভারসাম্যহীনতার মধ্যে রাজনীতি সমাজের জন্য ক্ষতিকর। যারা বংশপরম্পরায়অন্যায়ের মুখোমুখি হচ্ছে। যদি আপনি দলিত সাংসদ ও দলিত বিধায়ক , উপজাতি সাংসদ ও উপজাতি বিধায়কদেরসংখ্যা দেখেন , তাহলে দেখতে পাবেন বিজেপির তাতে ভালো সংখ্যকউপস্থিতি রয়েছে।

আমি বাবা সাহেব ভীমরাও আম্বেদকরের ১২৫তম জন্মজয়ন্তী পালন করার পর থেকেই , যখন রাষ্ট্রসংঘ তাঁর জয়ন্তী পালন করছে এবং ১০২টি দেশে ১২৫তমজন্মজয়ন্তী পালন করছে , সংসদেও বাবাসাহেব আম্বেদকরের জীবন ও কাজ নিয়ে দু ’দিনের আলোচনা হয়েছে বহু মানুষ ভাবতে শুরু করেছেন যে মোদি আম্বেদকরের ভক্ত।তারা সমস্যা তৈরি করতে শুরু করেন। যারা দলিতদের স্ব -নিযুক্তঅভিভাবক , তারা চান না যে মোদি দলিতদের সঙ্গে থাকুন বাউপজাতিদের জন্য নিজেকে উৎসর্গ করুন। আমি দলিত , নিপীড়িত ,অবহেলিত , বঞ্চিত , মহিলাদেরউন্নয়নের জন্য উৎসর্গীকৃত। যারা এসবকে তাদের রাজনীতির ক্ষেত্রে বাধা হিসেবে দেখেন ,তারাই সমস্যা তৈরি করেন।

এবং সেজন্যই তারা ভিত্তিহীন অভিযোগ করে থাকেন। যারা এই দেশকে বর্ণভেদের বিষপান করাচ্ছেন , তারা দেশকে ধ্বংস করছেন। সামাজিকসমস্যাকে রাজনৈতিক রঙ দেওয়া তাদেরকে বন্ধ করতে হবে। একটি উদ্দেশ্য নিয়ে আমাদেরএগিয়ে যেতে হবে। এবং আমি সমাজকেও প্রশ্ন করতে চাই : এধরনেরঘটনা কি একটি সভ্য সমাজে মানায় ?

লাল কেল্লার প্রাচীর থেকে আমি ধর্ষণের ঘটনা নিয়ে বলেছি … আমি বলছি যে , মা -বাবাকেতাদের ছেলেদেরও জিজ্ঞাসা করা উচিত যে তারা কোথায় যাচ্ছে , কীকরছে ? আমরা আমাদের মেয়েদের এই প্রশ্ন করি।

এবং আমি তা আমাদের রাজনীতিকদেরও বলতে চাই , বলতেচাই আমার দলের নেতাদেরও যেকোন ব্যক্তি বা কোনো সম্প্রদায় সম্পকে মিডিয়ার সামনেযেকোন কিছু বলে দেওয়া বেপরোয়া বিকৃতি। মিডিয়া তো আপনার সামনে আসবেই। তার টি আর পি ’র প্রয়োজন। কিন্তু আপনাকে দেশের সমানে জবাবদিহি করতে হবে। তাই যারা সার্বজনিকক্ষেত্রে কাজ করেন … তা তিনি রাজনৈতিক বা সামাজিক কর্মীও হতেপারেন – এমনকি যদি আমরা কোনো নির্দিষ্ট সম্প্রদায়েরও প্রতিনিধিত্বকরে থাকি -তাহলেও দেশের একতার জন্য , সমাজেরএকতার স্বার্থেই আমাদেরকে আরও বেশি সতর্ক হতে হবে।

যখন আমরা আহত হই , এমন কি কাগজেরও সামান্য স্পর্শব্যাথা সৃষ্টি করে। হাজার হাজার বছরের অবিচার সেই ক্ষতস্থানকে উন্মুক্ত করেদিয়েচে। সামান্য ক্ষতিও এখন অনেক ব্যথার জন্ম দেবে। তাই ঘটনাটি বড় না ছোট সেটাকোনো বিষয় নয় , বিষয়টি হচ্ছে এই ঘটনাটি ঘটা সঠিক নয়। কোনসরকারের সময়ে বেশি ঘটনা অথভা কোন সরকারের সময় কম সেটা কোনো বিষয় নয়। দেশের এতাকেশক্তিশালী করার জন্য আমাদের সবাইকে সম্মিলিত ভাবে কাজকরতে হবে।

প্রশ্ন : অর্থনৈতিকউন্নয়নের জন্য সামাজিক সম্প্রীতি কতটুকু গুরুত্বপূর্ণ ?

পিএম মোদি: অর্থনৈতিক উন্নয়ন এককভাবে কোনোসমাধান নয়। সমাজের জন্য শান্তি , একতা ওসম্প্রীতি আবশ্যক। একটি পরিবারের ক্ষেত্রেও আপনি কতটা স্বচ্ছল , তা কোনো বিষয় নয় – এমনকি আপনি টাকার পাহাড়ে বসে থাকতেপারেন , কিন্তু পরিবারের একতাই হচ্ছে গুরুত্বপূর্ণ। এটাসমাজের ক্ষেত্রে সমান সত্যি। আমরা শুধুমাত্র দারিদ্রের সঙ্গে লড়াই করার জন্যই একতাচাইনা। আমাদের ঐক্য ও সম্প্রীতিপূর্ণ হতে হবে। সামাজিক ন্যায়ের প্রতি আমাদেরপ্রতিশ্রুতিবদ্ধ থাকতে হবে। আর সেজন্যই একতা শুধুমাত্র অর্থনৈতিক উন্নয়নের জন্যইগুরুত্বপূর্ণ নয়। শান্তি , একতা ও সম্প্রীতি প্রয়োজন পরিবার ,জীবন , সমাজ ও দেশের জন্য। এ্র তাদের জন্যও ,যারা বিশ্বাস করেন বসুধৈবকুটুম্বকম -সমস্তবিশ্ব এক।

প্রশ্ন: সব রাজনৈতিক দলই দারিদ্র্য দূরীকরণ নিয়ে বলে থাকে।তারপরও আমাদের দেশে দারিদ্রহ এক বিশেষ উদ্বেগের বিষয় হয়ে রয়েগেছে। কর্মসংস্থানতৈরি করা আপনার কাছে এক বড় প্রতিকূলতা এবং আপনিও তা মাথায় রেখেছেন। এই দু’ক্ষেত্রেআপনার কৌশল কী হবে?

পিএম মোদি: আপনি ঠিকই বলেছেন। দারিদ্র্যদূরীকরণ এক রাজনৈতিক স্লোগান হয়ে গেছে। দারিদ্র্য নিয়ে অনেক রাজনীতি হচ্ছে। এবংনির্বাচনকে মাথায় রেখে দারিদ্র্য দূরীকরণের অনেক কর্মসূচি শুরু হয়েছিল। সেগুলিখারাপ ছিল না ভালো ছিল, তা নিয়ে আমি কোনো বিতকে যেতে চাই না। কিন্তু আমার পথকিছুটা ভিন্ন রকমের। দারিদ্র্য দূর করতে হলে আমাদেরকে দরিদ্রদের সক্ষম করে তুলতেহবে, তাহলেই দারিদ্র্য নির্মূলীকরণের জন্য তাদের কাছে যথেষ্ট ক্ষমতা এসে যাবে।দরিদ্রদের দরিদ্র হিসেবে রেখে রাজনীতি আসতে পারে। কিন্তু দারিদ্র্য থেকে মুক্তিএকমাত্র আসতে পারে সক্ষমতার মাধ্যমেই। ক্ষমতায়ণের বড় হাতিয়ার হচ্ছে শিক্ষা। এরপরবর্তী বিষয় হচ্ছে কর্মসংস্থান। যদি আমরা অর্থনৈতিক ক্ষমতায়ন পাই, তাহলে বিষয়টিনিজে থেকেই পরিবর্তনের হাতিয়ার হিসেবে কাজ করবে।

গত কয়েক বছরে আমরা যেসব উদ্যোগ নিয়েছি, যেমন মুদ্রা প্রকল্প-অন্তত ৩.৫ কোটিমানুষে মুদ্রা প্রকল্পের সুবিধা নিয়েছেন এবং এই প্রকল্পের মাধ্যমে তারা ১.২৫ লক্ষকোটি টাকা পেয়েছেন। এদের মধ্যে অনেকেই রয়েছেন যারা ব্যাঙ্ক থেকে প্রথমবারের মতটাকা পেয়েছেন। এই মানুষেরা অন্যের জন্য কিছু করবেন। তাঁরা সেলাই মেশিন পাবেন, কাপড়সেলাই করবেন… তাঁরা কিছু করবেন। এটাসম্ভব যে তাঁরা কিছু মানুষকে কাজের সুযোগকরে দেবেন। এই সক্ষমতা ওই মানুষগুলিকে তাঁদের ছেলেমেয়েদের শিক্ষার সুযোগ করেদেওয়ার জন্য অনেক ক্ষমতা এনে দেবে।

ধরুণ কোনো ব্যক্তি ট্যাক্সি কিনলেন। তাহলে তাঁরা অনুভব করবেন যে তাদেরছেলেমেয়েদের শিক্ষিত করে তুলতে হবে। তাঁরা এতে সামনে এগিয়ে যাবেন। আমরা এক্ষেত্রেযেকাজটা করেছি তা হচ্ছে, স্ট্যান্ড আপ ইন্ডিয়া। আমি ব্যাঙ্কগুলিকে বলেছি যেপ্রত্যেকটি শাখাকে দলিত, উপজাতি ও মহিলাদেরকে আর্থিক সহায়তা অবশ্যই দিতে হবে।এদেরকে একেকজন উদ্যোগী হিসেবে তৈরি করে তুলতে হবে।

দেশে ব্যাঙ্কের ১.২৫ লক্ষ শাখা রয়েছে। তারা যদি প্রত্যেকে অন্তত তিনজনকে সক্ষমকরে তুলেন, তাহলে তারা ৪-৫ লক্ষ পরিবারকে সহায়তা করবেন। যেসব মানুষের সেরকম আর্থিকসক্ষমতা ছিল না, তারাও সক্ষম অনুভব করবেন। তাদের অর্থনৈতিক ক্ষমতা হবে। স্টার্ট আপইন্ডিয়া… যুবসমাজকে কর্মসংস্থান দিতে এই প্রকল্প আমি শুরু করেছি। এগুলো ছোট ছোটসিদ্ধান্ত। আমি রাজ্যগুলিকেও পরামর্শ দিয়েছি যে, এই লক্ষ্যে তাদেরও এগিয়ে যেতেহবে।

আমাদের দেশে বড় বড় বিপনী রয়েছে। এগুলো নির্মাণে লক্ষ কোটি টাকা খরচ হয়। তাদেরকোনো সময়সীমা নেই। তারা রাত দশটা, বারোটা, ভোর চারটে পর্যন্ত তা চালিয়ে যেতে পারে।কিন্তু হাতে লাঠি নিয়ে এক সরকারি কর্মচারী ছোট দোকানদারকে দোকান বন্ধ করতে বলবে…কেন? সেইসব ছোট ছোট ব্যবসায়ীরা যারা ক্ষুদ্র উদ্যোগী, তারা ৩৬৫ দিন চব্বিশঘন্টা সাত দিন দোকান খুলতে পারবেন… যাতে তারা ব্যবসা করতে পারেন এবং কিছুকর্মসংস্থানও করতে পারেন। এবং এরাই হচ্ছেনসেই মানুষ যারা দেশের অর্থনীতিকে চালিত করে থাকেন। এটা হচ্ছে সেই ক্ষেত্র যেখানেআমরা সক্ষমতার জন্য কাজ করছি।

আমরা দক্ষতা উন্নয়নের জন্য অনেক জোর দিচ্ছি। দক্ষতা উন্নয়ন হচ্ছেসময়ের দাবি। আমরা পদ্ধতির পরিবর্তন করেছি। দক্ষতা উন্নয়নের মন্ত্রক রয়েছে। এরআলাদা বাজেট রয়েছে। আর এর কাজ হচ্ছে বিশালসংখ্যায়। সরকারের মাধ্যমে দক্ষতা উন্নয়ন,সরকারি-বেসরকারি সহযোগিতায় দক্ষতা উন্নয়ন, যেসব দক্ষতা বিকাশে যারা ভাল কাজ করেছেসেইসব দেশের সহযোগিতায় দক্ষতা বিশ্ববিদ্যালয়ের মাধ্যমে দক্ষতা উন্নয়ন। দেশে ৮০কোটি যুবক-যুবতী রয়েছেন। তাদের বয়স ৩০ বছরের নীচে। যদি এই যুব সমাজ দক্ষতাপ্রাপ্তহয়, তাহলে তারা দেশের ভাগ্য পরিবর্তন করতে পারে। এবং আমরা সেক্ষেত্রে জোর দিচ্ছি।সমস্ত রকম আর্থিক কাজকর্মের কেন্দ্রবিন্দু হচ্ছে দেশের যুব সমাজ ও কর্মসংস্থান।কৃষিক্ষেত্রেও যদি আপনি ‘ভ্যালু এডিসন’ করার দিকে এগিয়ে যান, তাহলে তা কর্মসংস্থানসৃষ্টির অনেক সুযোগ তৈরি করবে। গ্রামের যুবক, যে কিনা পরিস্থিতির চাপে বড় শহরেযেতে বাধ্য হয়, তাকে যদি ‘ভ্যালু এডিসন’ করার ও কৃষি-নির্ভর গ্রামীণ উন্নয়ন সুযোগদেওয়া হয়, যদি আমরা তাকে সক্ষম করি, তাহলে কর্মসংস্থানের সুযোগ অবশ্যই তৈরি হবে।আমরা এক্ষেত্রে জোর দিচ্ছি। এবং আমরা কিছু ভালো ফলাফলও দেখতে পাচ্ছি।

প্রশ্ন:  আপনিই প্রথমপ্রধানমন্ত্রী যিনি প্রবাসী ভারতীয়দের সঙ্গে সরাসরি যোগাযোগ করেছেন। এর ফলে দেশেরকতটা সুবিধা হয়েছে ?

পিএম মোদি:  সবকিছুকেলাভ এবং লোকসানের মানদন্ডে মাপা উচিত হবে না। বিশ্বের যে কোন প্রান্তের যে কোনভারতীয় , তিনি যে পদ-এ কাজ করুন নন কেন , অন্তরে এই অনুভূতি থাকে যে , আমার দেশ অবশ্যইএগুবে।

এবং তারা যদিদেশ সম্পর্কে বিরূপ খবর পান , তাহলে তারা  অত্যন্ত মর্মাহত হন। যেহেতু তারা বাইরে থাকেন , এটাতাদের আরও বেশি পীড়া দেয়। আমরা অনেক কিছুতে অভ্যস্ত হয়ে যাই। তারা প্রভাবিত হন।দেশের জন্য তাদের অসীম দরদ। কিন্তু তারা সুযোগ বা মাধ্যম পান না। আমরা নীতি আয়োগেপ্রবাসী ভারতীয়দের ক্ষমতা স্বীকার করেছি। এটা এমনই বিশ্বব্যাপী শক্তি। তাদের বিশ্বব্যাপীপ্রকাশ।

তাদের অধ্যয়নবিষয়ক গুণ এবং যোগ্যতা আছে …… দেশের জন্য কাজ করার আগ্রহ। এবং তারা যেখানেইথাকুন না কেন , দেশের জন্য তাদের ভালবাসা কমে নি। কেনআমরা তাদের সঙ্গে সম্পর্ক ছেদ করবো ? আমরা অবশ্যই তাদেরসঙ্গে যোগসূত্র স্থাপন করবো।

এবং এমন একসময় আসবে , যখন তারা সত্যিই ভারতের দূত হবেন। এবংআমি লক্ষ্য করেছি যে , সরকারের মিশনের চাইতেও প্রবাসীদেরমনোভাব ও সংযোগের জন্য ভারতের শক্তিমত্তা। মিশন এবং প্রবাসী  – যখন এই দুটো একসঙ্গে জুড়ে যায় , আমাদের শক্তিঅনেকগুণ বৃদ্ধি পায়। এজন্য এটাই ছিল আমার ভূমিকা এবং আমরা ভাল ফল পাচ্ছি।

পিএম মোদি:  প্রথমত: এটাদু:খের বিষয় যে , আমাদের দেশে আমরা যা করি , সেগুলি তৎক্ষনাৎ নির্বাচনের সঙ্গে জুড়ে যায়। উত্তরপ্রদেশ নির্বাচন এখনোদূরে রয়েছে , তবুও আমাদের সব সিদ্ধান্তগুলিকে এর সঙ্গেজুড়ে দেওযা হচ্ছে।

রাজনৈতিকসুপার পন্ডিতরা তাদের মন থেকে রাজনীতি ছাড়তে পারছেন না। বাতানুকুল ঘরে তাদেররাজনৈতিক মনের গুঞ্জন দ্রুততর হয়। আবার , আমাদেরদেশে ঘন ঘন নির্বাচন হয়। এখানে নির্বাচন , ওখানেনির্বাচন …… নির্বাচন , নির্বাচন , নির্বাচন।

রাজনৈতিকদাঁড়িপাল্লায় প্রতিটি সিদ্ধান্তের ওজন করা হয়। যত সময় আমরা ইস্যু এবংসিদ্ধান্তসমূহকে নির্বাচনের সঙ্গে যুক্ত করে চলবো , তত সময়আমাদের দেশের জন্য তা বিরূপ প্রভাব ফেলবে। এই দুটোকে আলাদা করার এটাই প্রকৃষ্টসময়। নির্বাচন ঘোষনার পর দলগুলি নিজেদের ইস্তেহার প্রকাশ করবে। এখন এগুলিকে যুক্তকরা কেন ?

রাজনৈতিকদলের নেতৃবৃন্দ যখন আমার সঙ্গে সাক্ষাৎ করেন , তখন তারাদ্ব্যর্থহীনভাবে আমাকে বলেন , দয়া করে আসুন আমরানির্বাচনকে সরিয়ে রাখি। তারা আমাকে বলেন , ‘বিধানসভানির্বাচনকে কেন আমরা লোকসভা নির্বাচনের সঙ্গে সংযুক্ত করি না ?’

এবং একই সময়েআমরা স্থানীয় প্রতিষ্ঠানের নির্বাচনগুলি করি না কেন , যাতেসমগ্র নির্বাচন প্রক্রিয়াটি এক সপ্তাহ থেকে ১০দিনের মধ্যে শেষ হয় এবং পাঁচ বছরেরজন্য দেশ বাধাহীনভাবে চলতে পারে ?

সিদ্ধান্তনেওয়া যাবে এবং কাজে গতি আসবে এবং আমলাতন্ত্র যথাযথভাবে কাজ করবে। প্রতিটি দল এইকথা বলছে , কিন্তু কোন একটি দল এটির বিষয়েসিদ্ধান্ত নিতে পারে না। সব দলগুলিকে সম্মিলিতভাবে এটা করতে হবে। সরকার একা এটাকরতে পারে না। নির্বাচন কমিশন এই প্রয়াসে নেতৃত্ব দিচ্ছে এবং সব দলগুলিকে এতে রাজিহতে হবে।

আমার নিজস্বধারণা থাকতে পারে , কিন্তু আমি একা এই ব্যাপারে কিছু করতেপারি না। এটা গণতান্ত্রিক উপায়ে করতে হবে। কিন্তু আমি আশা করি , কোন একদিন এই বিষয়ে বিস্তৃত আলোচনা ও বিতর্ক হবে।

আগামীদিনগুলিতে পাঁচ রাজ্যে নির্বাচন হবে এবং এগুলির মধ্যে উত্তরপ্রদেশ হল একটি।এক্ষেত্রে বি জে পি সম্পর্কে বলা যায় , আমরাকেবলমাত্র উন্নয়নের ইস্যুতে নির্বাচন লড়বো। কৃষক , গ্রামেরবিকাশ , যুবকদের কর্মসংস্থানের উপর আমরা আলোকপাত করবোএবং আমরা সামাজিক ন্যায়বিচারের জন্য প্রতিশ্রুতিবদ্ধ থাকবো। দেশে শান্তি রক্ষা করা , একতা এবং ভ্রাতৃত্বের উপর আমাদের নজর থাকবে। এই বিষয়সমূহের জন্য আমরাপদক্ষেপ গ্রহন করবো এবং সামনের দিকে এগিয়ে চলব।

পিএম মোদি:  জাতিভেদ এবংসাম্প্রদায়িক ভোট ব্যাঙ্কের বিষ আমাদের দেশের যথেষ্ঠ ক্ষতি করেছে। আমাদেরগণতন্ত্রকে শক্তিশালী করার পথে সবচেয়ে বড় বাধা হল ভোট ব্যাঙ্ক রাজনীতি। গত সাধারণনির্বাচনে ভোট ব্যাঙ্ক রাজনীতির কোন বাতাবরন ছিল না।

উন্নয়নমূলকরাজনীতির বাতাবরন ছিল। ত্রিশ বছর পর , সামাদেরসমাজের সকল অংশ সম্মিলিতভাবে সংখ্যাগরিষ্ঠ সরকারের জন্য ভোট দিয়েছে। আমাদের সমাজেরএকটি সমগ্র বর্গ (অংশ) অবস্থান বদল করেছে। এটা সম্ভবপর ব্যাপার যে , উত্তরপ্রদেশের বিকাশের জন্য এই ধরণের ঘটনা উত্তরপ্রদেশের জনগণ আবার করবেন।উন্নয়নের বিষয়টি মনে রেখে তারা ভোট দেবে।

পিএম মোদি: যখনই আমরা জম্মু ও কাশ্মীরনিয়ে কথা বলি , আমাদের সমগ্র জম্মু , কাশ্মীর উপত্যকা এবং লাডাখ অঞ্চলের কথা বিবেচনায় রাখতে হবে। স্বাধীনতারসময় এবং দেশভাগের সময় থেকেই সমস্যা বীজ বপন করা হয়।

প্রতিটিসরকারকেই এই সমস্যার সঙ্গে যুঝতে হয়েছে। এটা নতুন কোন সমস্যা নয়। এটা একটি পুরানোসমস্যা। আমি বিশ্বাস করি , কাশ্মীরের যুবকরা বিভ্রান্ত হবে না।আমরা শান্তি , একতা এবং মঙ্গলকামনায় এসঙ্গে এগুবো যাতেস্বর্গ হিসেবে পরিচিত কাশ্মীর যেন স্বর্গই হয়ে থাকে।

সমস্যাবলীরওসমাধান হবে। সেজন্য আমি সবসময় এটা বলি যে , কাশ্মীরেরজনগণের প্রয়োজন উন্নয়ন এবং আস্থা। এবং ১ বিলিয়ন ভারতীয় সব সময়ই উন্নয়নের প্রতিপ্রতিজ্ঞাবদ্ধ এবং কখনোই আস্থার প্রতিশ্রুতি থেকে সরে আসে নি। এই বিশ্বাস সেখানেআজও রয়েছে এবং ভবিষ্যতেও থাকবে। আমরা উন্নয়ন ও আস্থার পথে চলব। এবং আমরা সফল হব।

প্রশ্ন:  আপনার আমলেউচ্চস্তরে দুর্নীতি বহুলাংশে কমেছে বলে ব্যাপকভাবে বিশ্বাস করা হয় , কিন্তু নিচু স্তরে দুর্নীতি এখনো নিয়ন্ত্রণহীন। এর সমাধান আপনি কী করেকরবেন ?

পিএম মোদি:  আমি আপনারকাছে কৃতজ্ঞ যে উচ্চ স্তরে দুর্নীতি না থাকার বিষয়টি আপনি মেনে নিয়েছেন। গো-মুখেযদি গঙ্গা নির্মল হয় , তাহলে যখন এটি নিচে বয়ে যাবে সেসময়ক্রমেই এটি বিশুধ্ হবে। আপনি হয়তো লক্ষ্য করেছেন যে আমরা এমন বহু পদক্ষপ নিয়েছিযাতে দুর্নীতির সম্ভাবনা প্রতিরোধ করা হয়েছে।

উদাহরনস্বরূপ , আমরা গ্যাসের ভুর্তকীর ব্যবস্থাকে বদলে প্রত্যক্ষ সুবিধাপ্রদান প্রকল্পচালু করেছি। ভুতুড়ে ভোক্তা যারা অন্যায়ভাবে গ্যাসে ভুর্তকীর সুবিধা ভোগ করতো , আজ আর সে সুবিধা নেই। চন্ডিগড়ে ৩০ রক্ষ লিটার কেরোসিন সরবরাহ করা হতো।প্রযুক্তি ব্যবহার করে আমরা গ্যাসের ও বিদ্যুতের সংযোগ রয়েছে এমন বাড়িতে কেরোসিনসরবরাহ বন্ধ করেছি। এবং আগে যাদের গ্যাসের সংযোগ ছিল না , আমরা তাদের গ্যাসের সংযোগ দিয়েছি। এইভাবে আমরা চন্ডিগড়কে কেরোসিন মুক্তকরেছি এবং কালো বাজারে বিক্রি হওয়া ৩০ লক্ষ লিটার কেরোসিন বাঁচিয়েছি।

আরেকদিন , হরিয়ানার মুখ্যমন্ত্রী আমাকে বলছিলেন , তিনি এইনভেম্বর মাসের মধ্যে আটটি জেলাকে কেরোসিনমুক্ত করবেন। আপনি জানেন আমাদের কৃষকরাইউরিয়ার জন্য মরিয়া এবং কালোবাজার থেকে কিনতে অভ্যস্ত।

কোন কোনরাজ্যে কালোবাজার থেকে ইউরিয়া কিনছে এমন কৃষকদের উপর লাঠিচার্জ করা হয়েছে। আপনিনিশ্চয়ই লক্ষ্য করেছেন , এই সময়ে ইউরিয়া ঘাটতির কোন খবর নেই।কৃষকরা কোথাও সারিবদ্ধভাবে লাইনে নেই , কোথাও লাঠিচার্জনেই এবং কালোবাজারি বন্ধ হয়েছে। এটা আর হচ্ছে না কেন ?

আগে কৃষকদেরইউরিয়া রাসায়নিক কারখানায় সুচতুরভাবে পৌঁছে দেওয়া হতো।রাসায়নিক কারখানাগুলি এটিকেকাঁচামাল হিসেবে ব্যবহার করতো এবং পণ্য উৎপন্ন করতো। তারা সস্তায় ইউরিয়াপেত।

রাসায়নিককারখানা এবং মধ্যসত্ত্বভোগীরা ফায়দা লুটতো। আমরা ইউরিয়ার উপর নিমের আস্তরন লাগানোশুরু করলাম। এরফলে রাসায়নিক কারখানাগুলি এক গ্রামও ইউরিয়া ব্যবহার করতে পারে নাএবং পুরো ১০০% ইউরিয়া এখন কেবলমাত্র চাষাবাদে ব্যবহৃত হয়।

এছাড়াও , আমরা ইউরিয়া উৎপাদন ২০ লক্ষ টন বাড়িয়েছি। আমদানিকৃত ইউরিয়ায়ও আমরা নিমেরআস্তরণ লাগাচ্ছি। এই শুধু নয় , গুজরাটের আদিবাসীরা যারাএই কাজের জন্য নিমের বীজ সংগ্রহ করে , তারা নিমের আস্তরণলাগানোর সময় নিম তেল নিস্কাশনও করছে এবং ১০ থেকে ১২ কোটি টাকা আয় করেছে। এটা সবদিক থেকে উইন-উইন পরিস্থিতি। দুর্নীতি এবং অসুবিধা দূর হয়েছে। একইভাবে , নীতিগত সিদ্ধান্ত ও প্রযুক্তির মাধ্যমে নিচুস্তরে দুর্নীতি দূর করতে পারি।উচ্চ স্তরে যা আপনি পছন্দ করেছেন , নিচুস্তরেও তা পছন্দকরতে আপনি শুরু করবেন।

প্রশ্ন:  মি. প্রাইমমিনিষ্টার , এটা বলা হয় যে , লাটিয়ানস্ দিল্লি আপনাকে পছন্দ করে না , কিন্তুআপনি কি দিল্লিকে পছন্দ করতে শুরু করেছেন ?

পিএম মোদি:  আপনি জানেন , প্রধানমন্ত্রীর পদ এমনই যে সেখানে লাটিয়ানস্ দিল্লিকে পছন্দ বা অপছন্দকরার কোন প্রশ্ন নেই। কিন্তি এব্যাপারটা অনুধাবন করা দরকার। দিল্লির ক্ষমতারঅলিন্দে , কিছু লোকের একটি সক্রিয় গ্রুপ আছে , যেটি কেবলমাত্র মুষ্টিমেয়-র জন্য নিবেদিত। এটা হতে পারে তাদের নিজস্বকারনে অথবা ব্যক্তিগত লাভের কারণে।

এটা মোদিবিষয়ে প্রশ্ন নয়। ইতিহাসের দিকে তাকিয়ে দেখুন। কী হয়েছিল সর্দার প্যাটেলের সঙ্গে।এই গ্রুপটি সর্দার প্যাটেলকে গ্রামের সাধারণ বুদ্ধিসম্পন্ন একজন সাদাসিদে ব্যক্তিহিসেবে তুলে ধরেছিল।দেখুন মোরারজী দেশাই-এর ক্ষেত্রে কী ঘটেছিল। এই একই গ্রুপকখনোই তাঁর সামর্থ্য , কৃতিত্ব সম্পর্কে কখনো কথা বলে নি।এটি কেবলমাত্র তিনি কী পান করতেন , তা নিয়ে সব সময়আলোচনা করেছে।

দেবগৌড়ার ক্ষেত্রে কী হয়েছিল ? একজন কৃষকের ছেলে পিএম হয়েছে , তবুও ওরা বলতোতিনি কেবল ঘুমান। এবং কী হয়েছিল অসাধারণ মেধাসম্পন্ন আম্বেদকের সঙ্গে , যাঁকে আজ ওরা প্রশংসা করছে। তাঁকে হাসির খোরাক বানিয়েছিল। কী হয়েছিলচৌধুরী চরণ সিং-এর সঙ্গে ? ওরা তাঁকেও হাসির খোরাকবানিয়েছিল। কাজেই যখন ওরা আমাকেও হাসির পাত্র বানায় , আমিআশ্চর্যান্বিত হই না। এই জিম্মাদাররা যারা নির্দিষ্ট কিছু মুষ্টিমেয় লোকের প্রতিনিবেদিত প্রাণ , তারা কখনোই যাদের দেশের মূলের সঙ্গেসংযোগ , তাদের গ্রহন করতে পারবে না। সেজন্য আমিও ঐগ্রুপের জন্য আমার সময়ের অপব্যয় করতে চাই না। বিলিয়ন লোকের কল্যাণ সাধন আমার কাছেবৃহত্তর করণীয় কাজ এবং আমি যদি নিজেকে লাটিয়ানস্ দিল্লির সঙ্গে নিজেকে সংযুক্ত নাকরি তা হলে আমি কিছু হারাবো না। এটাই ভাল হয় , যদি আমি এদেশেরগরিব মানুষ , যারা আমার মত , তাদেরসঙ্গে বাঁচতে পারি।

প্রশ্ন:  মিডিয়াসার্কেলে এটা প্রায়ই বলা হয় যে , যদি কারুর টি আর পি ডাউন থাকে, তাহলেসোজা মোদিজীর র‍্যালিতে চলে যাও  ।   তবুও আপনারসঙ্গে মিডিয়ার সঙ্গে  একটা অম্ল-মধুর সম্পর্ক রয়েছে। মিডিয়াসম্পর্কে আপনার কী বলার আছে ?

পিএম মোদি:  আমি আজ যাহয়েছি , তার পিছনে মিডিয়া বড় ভূমিকা পালনকরেছে। হ্যাঁ , আমি যেখানে সেখানে সাউন্ডবাইট দিই না।মিডিয়া এটা অভিযোগ করতেই পারে যে , মোদিজি মসলাদার , বিতর্কিত মন্তব্য করেন না।

আমি মূলত:আমার কাজের সঙ্গেই জড়িত এবং আমার কাজই কথা বলে। দীর্ঘকাল আমি সাংগঠনিক কাজে যুক্তছিলাম। সেজন্য মিডিয়া দুনিয়ার সঙ্গে আমার মজবুত বন্ধুত্বপূর্ণ মেলামেশা আছে। এমনকোন মিডিয়া ব্যক্তিত্ব নেই , যার সঙ্গে আমি চা-পান করি নি এবং মজাকরি নি। তাদের অনেককে আমি নাম ধরেই চিনি। সেজন্য ঐরকম প্রত্যাশা স্বাভাবিক। আমারমত কেউ , যিনি তাদের সঙ্গে বন্ধু হিসেবে সময় কাটিয়েছেনএমন কাউকে নয় , মিডিয়া সাধারনত: বড়মাপের ব্যক্তিত্বকে পিএমহতে দেখেছে।

মিডিয়া তাদেরকাজ করছে এবং তা করবে। আমি বিশ্বাস করি যে মিডিয়া কঠোরভাবে সরকারের কাজের চর্চা বাসমালোচনা করবে। এছাড়া গণতন্ত্র ঠিকভাবে কাজ করে না। কিন্তু দু:খের বিষয় , টি আর পি ’র ইঁদুর দৌড়ে , গবেষণারজন্য মিডিয়ার হাতে যথেষ্ঠ সময় নেই। গবেষণা ছাড়া চর্চা বা সমালোচনা সম্ভব না। দশমিনিটের জন্য সমালোচনা করতে আপনাকে ১০ ঘন্টার গবেষনা করা দরকার।  সমালোচনার বদলে অভিযোগ আরোপ করা হচ্ছে  ।

ফলস্বরূপ , গণতন্ত্র দুর্বল হয়ে পড়ে। মিডিয়ার সমালোচনা সম্পর্কে সরকার অবশ্যই ভীতথাকবে , কিন্তু দ্রুত তা দূর হয়ে যাচ্ছে। আমি চাই প্রকৃতঘটনার উপর ভিত্তি করে মিডিয়া সমালোচকের ভূমিকা পালন করুক। এতে দেশ উপকৃত হবে। এটাসত্য যে , মিডিয়ার নিজস্ব কিছু বাধ্যবাধকতা আছে।মিডিয়াকে টি আর পি ’র দৌড়ে জিততে হবে। এজন্য আমি খুশি যে আমিঅন্তত এই কারণে তাদের কাছে উপযোগী।  আমার র‌্যালির চাইতে,আমাকে গালাগাল দেয় এমন লোকদের নিয়ে টি আর পি বাড়ানো চেষ্টা করছে  ।

মিডিয়ার মতইবিচারব্যবস্থার সঙ্গেও আপনার টানাপোড়েন এবং উত্তেজনাপূর্ণ   সম্পর্করয়েছে বলে ধারণা করা হয়। কেন ?

এটা সম্পূর্ণভাবে ভুল ধারণা। এইসরকার নিয়ম , আইন এবং সংবিধান মেনে চলে। এক্ষেত্রেকোন সাংবিধানিক সংস্থার সঙ্গে কোন ধরণের মোকাবিলা বা চাপা উত্তেজনার সুযোগ নেই।সাংবিধানিক রীতিনীতির জন্য যতটা দরকার ততটা উষ্ণ সম্পর্ক বিচার ব্যবস্থার সঙ্গেথাকা উচিত। এই রীতিনীতি আমি যতটা সম্ভব মেনে চলতে আমার সর্বোত্তম চেষ্টা করি।

প্রশ্ন : আমি আপনাকেকিছু ব্যক্তিগত প্রশ্ন জিজ্ঞাসা করতে চাই। শক্তিশালী জননেতা হিসেবে আপনার ইমেজরয়েছে। কিন্তু কয়েকটি ঘটনায় আপনার আবেগপ্রবণ দিকটি বেরিয়ে এসেছে। আপনি কেমন ধরনেরমানুষ সেটা জনগন জানতে ইচ্ছুক। প্রকৃত নরেন্দ্র মোদি কোনটি, সেটা জানতে ইচ্ছুকদর্শ করা। অথবা মোদির চরিত্রে অনেক স্তর রয়েছে।

পিএম মোদি : একজন সৈনিকযিনি সীমান্তে সাহসিকতার সঙ্গে লড়াই করে এবং ঐ সৈনিকই যখন নিজের মেয়ের সঙ্গে খেলাকরে তখন একই রকমের আচরন করতে পারে না। নরেন্দ্র মোদি, তিনি যাই-ই হোক না কেন,সবকিছুর পর একজন মানুষ্য। কেন আমি আমার অন্তরে কি রয়েছে, তা চেপে বা লুকিয়ে রাখবো? আমি যা, আমি তাই। জনগণ যেমন দেখে, তেমনদেখুক। আমার কর্তব্য এবং দায়িত্ব সমূহেরপ্রশ্নে, আমাকে আমার সর্বোত্তম সামর্থ্য অনুযায়ী সেগুলি পূর্ণ করতে হবে । যদি আমাকে দেশের স্বার্থে কঠোর সিদ্ধান্ত নিতে হয়, তাহলেআমাকে সেই সিদ্ধান্ত নিতে হবে। যদি আমাকে এরজন্য কঠোর পরিশ্রম করতে হয়, আমি করবো।যদি আমাকে আনত হতে হবে। তবে আমি আনত হব। যদি আমাকে দ্রুত চলতে হয়। তবে আমি চলবো।কিন্তু এগুলি আমার চারিত্রিক বিষয়বস্ত নয়, এগুলি হল আমার দায়িত্ব সমূহের অংশ।সেখানে আসল কিংবা নকল মোদি’র কিছু নেই। মানুষ তো মানুষই।

যদি আপনিআপনার রাজনৈতিক চশমা খুলে ফেলেন, তখন আপনিআসল মোদিকে দেখবেন। কিন্তু আপনি ভুল করবেন যদি উপলব্ধি সঞ্জাত অনুভূতির মাধ্যমেমোদিকে বিচার করতে থাকেন।

প্রশ্ন: মোদিজী, আপনিযখন মুখ্যমন্ত্রী ছিলেন সেসময় আমি বহুবার গান্ধীনগরে এবং প্রধানমন্ত্রীর কার্যালয়(পিএম ও)-তেও আপনার সঙ্গে সাক্ষাৎ করেছি, আমি কখনোই আপনার টেবিলে কোন ফাইল,কাগজপত্র অথবা এমনকী ফোনও দেখিনি। আমাদের সাক্ষাৎ বৈঠকের সময় কেউ-ই মধ্যস্থ হয় নি।আপনি একজন সি ই ও-র মত কাজ করেন। কেউ বলে আপনি শোনেন বেশি এবং কথা বলেন কম। আপনারকাজ করার ধরন কেমন?

পিএম মোদি: আপনি ঠিকইপর্যবেক্ষণ করেছেন। আমাকে এমনভাবে চিত্রিত করা হয়েছে যে আমি হল সেইজন যে শুনতে চায়না এবং কেবলমাত্র কথা বলেন। বাস্তবিকপক্ষে আমি শুনি অনেক এবং পর্যবেক্ষনও করিঅনেকটা। এইভাবেই আমি একজন ব্যক্তি হিসেবে তৈরি হয়েছি। এর মাধ্যমে আমি অনেকটা উপকৃতহয়েছি। আমি একজন কাজ-পাগল, কিন্তু আসলে আমি সবসময়ই বর্তমান নিয়ে বাঁচতে চাই। যদিআপনি আমার সঙ্গে সাক্ষাৎ করতে আসেন, আমি সেই বৈঠকে নিমগ্ন হয়ে যাই, আমি ফোন ছুঁইনা বা কাগজপত্র দেখি না এবং আমি ফোকাস হারাই না। যখন আমি ফাইল দেখি আমি একইভাবেনিমগ্ন হয়ে যাই এবং ঐ ফাইলের মধ্যেই হারিয়ে যাই। আমি প্রতিটি মুহূর্তে বর্তমানসময়কে নিয়ে বাঁচি। আমার সঙ্গে যে ব্যক্তি সাক্ষাৎ করেন, তাকে উৎকৃষ্ট মানের সময়দিয়েছি বলে তিনি সব সময়ই সন্তষ্ট হন।

দ্বিতীয়ত;একজন অবশ্যই তার কাজের প্রতি সুবিচার করবেন। আমি সবসময়ই সেই চেষ্টা করি। একজনঅবশ্যই সবসময় শিখবে এবং অনুধাবন করবে। যে বিষয়গুলি অতীতে প্রাসঙ্গিক ছিল কিন্তুএখন আর নয়। সেইসব ধারনা সমূহকে বর্জন করার সাহস থাকতে হবে। নিজেকে পাল্টে ফেলারসাহস থাকতে হবে। এইভাবেই আমি আমার কাজের পদ্ধতি গড়ে তুলেছি।

প্রশ্ন : আপনার ১৬থেকে ১৮ ঘন্টার কঠোর অনুসূচীর হয়ে থাকে। কাজেই আপনি বিশ্রাম কখন করেন?

পিএম মোদি: আমি কাজেরমধ্যে দিয়েই বিশ্রাম করি। আমি কখনোই কাজ করতে ক্লান্ত হই না। আসলে বিপরীতপরিস্থিতিতেই আমি ক্লান্ত হই।

যদি আপনার দশটিচিঠি লিখতে হয় এবং আপনি হয়তো দুটো লেখার পরই ক্লান্তবোধ করবেন। কিন্তু যদি আপনি১০টি চিঠি লেখার কাজ শেষ করেন, তাহলে আপনি সন্তষ্ট হন এবং যেহেতু আপনার কাজ সমাপ্তহয়েছে বলে মনে করছেন, সেজন্য আপনি আপনার খাওয়াবাদ দিয়েছেন। আসলে কাজ না করে আপনিক্লান্ত হন এবং কাজ আপনাকে সন্তষ্টি প্রদান করে। ঐ সন্তষ্টিই আপনাকে শক্তি যোগায়। আমি এটা অনুভব করেছি এবং সর্বদা আমি একথাআমার তরুণ বন্ধুদের বলি। ক্লান্তি হল অনেকটাই মনস্তাতিক। সবারই বেশি কাজ করার জন্যআবশ্যিক সমপরিমান সামর্থ্য আছে। আপনি নয়া চ্যানেঞ্জ সমূহ গ্রহন করতে শুরু করুন এবংআপনার অন্তরাত্মা সবসময়ই আপনাকে সহায়তা করবে। এটা ইন-বিল্ট বা অন্ত:গ্রথিত বিষয়।

প্রশ্ন: আপনার জীবনেকার প্রভাব মুখ্য?

পিএম মোদি: আমারগ্রামটি গায়কোয়াড় এস্টেটের অন্তর্গত এবং শৈশবে ঐ পরিবেশ থেকে আমি অনেক কিছুপেয়েছে। গায়কোয়াড রাজার বৈশিষ্ট্য হল, তিনি প্রতিটি গ্রামে প্রাথমিক বিদ্যালয় এবংলাইব্রেরি স্থাপন করতেন। আমি ঐ বিদ্যালয়ে পড়েছি। বই-পড়ার প্রতি আকর্ষণ তৈরি হয়। এখন পড়ার যথেষ্ট সময় নেই। ঐ বইগুলি প্রভাব ফেলেছিল। বারো বছর বয়স থেকেআমি বাগ্মিতা প্রতিযোগিতায় অংশ নিতে শুরু করি। আমি বিবেকানন্দের উদ্ধৃতি এবং তাঁরকথা বলার স্টাইল পছন্দ করতাম। আমি হিন্দি ভাষা পছন্দ করতে শুরু করি। এটা আমি বলতেপারি, বিবেকানন্দের চিন্তাধারা আমার উপর প্রভূত প্রভাব ফেলেছে।

প্রশ্ন: নরেন্দ্রমোদি নিজেকে ভারতীয় ইতিহাসে কীভাবে দেখাতে চায়?

পিএম মোদি:একজন ব্যক্তিযে বর্তমান নিয়ে বাঁচতে চায়, সে কেন ইতিহাস নিয়ে চিন্তিত হবে? একজনঅবশ্যই তার জীবনে এই ভুল করবে না। দু:খের বিষয়, আমাদের দেশে, সরকার, রাজনৈতিকদলগুলি, নেতৃবৃন্দ সর্বদাই নিজেদের ইমেজ তৈরি করতে কঠোরভাবে চেষ্টা করে। কেমন হতোযদি আমরা আমাদের নিজস্ব ইমেজের বদলে দেশের ইমেজ গঠনে সমর্পিত হতাম। এই দেশের ইমেজহল ১.২৫ বিলিয়ন লোকের বিরামহীন পরম্পরা। মোদি হল ঐ ১.২৫ বিলিয়ন ভারতীয়দের মধ্যেএকজন। তার চাইতে বেশি কিছু নয়। ইতিহাসের পাতায় মোদির হারিয়ে যাওয়ার চাইতে আনন্দেরআর কিছু আমার নেই। মোদিজী, আমাকে আপনার এতটা সময় দেওয়ার জন্য ধন্যবাদ। এটা আমাদেরপ্রথম টিভি ইন্টারভিউ এবং আমি প্রধানমন্ত্রীর মত একজন ব্যক্তিইর সাক্ষাৎকার নিতেপেরে গর্বিত ও সম্মানিত।

পিএম মোদি: আপনি আর্থিকদুনিয়ার সঙ্গে সংযুক্ত একজন ব্যক্তি, তবুও আপনি রাজনৈতিক সাক্ষাৎকার নিলেন। আপনারআত্মবিশ্বাস আমার পছন্দ হয়েছে। আপনাকে অভিনন্দন এবং ভাল কাজ করা জারি রাখুন।

আপনি দয়া করেআমাদের সাক্ষাৎকার দিতে থাকুন…

পিএম মোদি: শুধুমাত্ররাজনৈতিক ব্যক্তিদের সাক্ষাৎ কার কেন। জীবনের অন্যান্য অংশের এত লোক রয়েছে।নির্বাচনের সময়, রিপোর্টরা বেডরুম থেকে শুটিং নেওয়া শুরু করে এবং প্রাত:রাশইত্যাদি বিষয় নিয়ে প্রশ্ন করতে শুরু করে।কিন্তু অনেকেই আমাদের ক্রীড়াবিদদের আত্মত্যাগের কথা জানে না । রাজনৈতিকব্যক্তিদের জন্য সময় নষ্ট না করে, আমাদের উচিত ক্রীড়াবিদ সম্পর্কে আরও বেশি সময়ব্যয় করা-কীভাবে উনারা নিজেদের খাদ্য, ঘুম নিয়ন্ত্রণ করেন, পরাজয়ের পরেও কীভাবেউনারা প্রতিজ্ঞাবদ্ধ থাকেন। আমাদের তরুনদের এই আত্মত্যাগ দেখাতে হবে।

আমি চাইব,আপনাদের চ্যানেল রিও দল থেকে ৩০জন ক্রীড়াবিদ কে বেছে নিক এবং তাদের জীবন কাহিনীতুলে ধরুক। এইভাবে আমরা আমাদের ক্রীড়াবিদদের দেখার ধরনবদলাতে পারি। এছাড়া, আমারধারনা, রাজনীতির বাইরেও সাক্ষাৎকার নেওয়ার মত অনেক ব্যক্তিত্ব রয়েছে।

Source: News 18